बक्सर युद्ध का गवाह बक्सर

09-Jul-2016 ||    ||   

बक्सर युद्ध का गवाह बक्सर नई दिल्ली। गंगा के किनारे बसा बक्सर है इसीलिए गंगा यहां के लोगों के जीवन में हर तरह से रची-बसी है। गंगा इस इलाक़े की जीवनदायिनी है। बक्सर युद्ध के लिए प्रसिद्ध यह जगह बिहार राज्य का प्रमुख जिला है। इसका जिला मुख्यालय बक्सर शहर है। राम रेखा घाट, ब्रह्मपुर, अहिरौली, चौसा और पलासी आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से है। बक्सर गंगा नदी के तट पर स्थित है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मीर कासिम ने बंगाल को ब्रिटिशों के हाथ से छीन दुबारा यहां पर राज किया था। 1764 ई. में उन्होंने मुगल शासक शाह आलम द्वितीय और अवध के नवाब शुजा-उद-दौला की सहायता की। 23 अक्टूबर 1764 में हुए युद्ध में मीर कासिम और उनकी सेना को ब्रिटिश मेजर हैक्टर मुनरो ने हरा दिया। मेजर हैक्टर ने 857 यूरोपियन सैनिकों और 6,213 सिपाहियों के साथ मीर कासिम पर हमला किया था। ऐतिहासिक महत्व होने के साथ-साथ यह स्थान हिन्दूओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से भी है। ऋषि विश्वामित्र ने इसी स्थान पर यज्ञ का संचालन किया था। उन्होंने भगवान राम को उनके बाल्य जीवन में अयोध्या से, राक्षसों से यज्ञ को बचाने के लिए यहां लाया था। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान रामचन्द्र और लक्ष्मण ने अपने गुरू ऋषि विश्वामित्र के साथ जनकपुर मार्ग से होते हुए गंगा नदी पार की थी। वह तीनों सीता स्वयंवर के लिए जनकपुर जा रहे थे। इसी कारण यह स्थान धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर यहां बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले को किचहारी मेला के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन करीबन 50,000 से भी अधिक लोग गंगा नदी में स्नान करते है जो कि रामरेखा घाट के नाम से प्रसिद्ध है। गंगा में स्नान करने का यह कार्यक्रम लगातार तीन दिनों तक चलता है। खरिका गांव राजपुर के दक्षिण.पश्चिम से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गांव 1857 ई. में बाबू कुंवर सिंह और ब्रिटिश सैनिकों के बीच हुए युद्ध की घटना के बाद सामने आया। बक्सर स्थित यह गांव विशेष रूप से प्राचीन ब्रह्मेश्वर मंदिर के लिए जाना जाता है। यह मंदिर मोहम्मद गजनवी के समय से यहां स्थित है।मुगल शासक अकबर के समय में राजा मान सिंह ने इस मंदिर का पुन: निर्माण करवाया था। बक्सर के उत्तर-पूर्व से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर अहिरौली गांव है। यह गांव देवी अहिल्या के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। पौराणिक कथा के अनुसार इसका सम्बध ईसा पूर्व काल से है। कहा जाता है कि गौतम ऋषि ने अपनी पत्नी को शाप दिया था जिस कारण वह पत्थर की बन गई थी। और वह पत्थर से पुन: स्त्री तभी बन सकती थी जब भगवान श्री राम इस जगह पर आए। यह जगह 1539 ई. में हुमायूं और शेरशाह के बीच हुए युद्ध के लिए प्रसिद्ध है। शेरशाह जब हुमायूं का पीछा कर रहा था, तब हुमायूं ने शेरशाह से बचने के लिए एक भिश्ती की सहायता ली थी। जिसने उसे गंगा नदी पार कराया था। भिश्ती की सेवा से प्रसन्न होकर हुमायूं ने उसे एक दिन के लिए अपना साम्राज्य सौप दिया था। यह जगह सन् 1757 ई. में ब्रिटिश सैनिकों और बंगाल के नवाब मीरकासिम के बीच हुए युद्ध के लिए जानी जाती है। यह युद्ध बक्सर शहर के पूर्व से छ: किलोमीटर की दूरी पर स्थित काथीकौली में हुआ था। वर्तमान समय में बक्सर शहर बक्सर जिले का मुख्यालय है।

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