महाकाव्य महाभारत से जमुई का संबंध

08-Jul-2016 ||    ||   

महाकाव्य महाभारत से जमुई का संबंध जमुई बिहार के जमुई जिला का मुख्यालय है। यह जैनों के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। प्राचीन समय में इस जगह को जूम्भिकग्राम और जमबुबानी के नाम से जाना जाता था। ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण रहा है। सेंट थॉमस चर्च, गुरूद्वारा पक्की संगत, मिन्टो टॉवर, जैन मंदिर धर्मशाला, चन्द्रशेखर संग्रहालय और काली मंदिर आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। माना जाता है कि 24वें र्तीथकर भगवान महावीर ने उज्जिहवलिया नदी के तट पर स्थित जूम्भिकग्राम में दिव्य ज्ञान प्राप्त किया था। इस जिले की स्थापना गुप्त, पाल और चन्देल शासकों ने की थी। जमुई का संबंध प्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत से भी जोड़ा जाता है। जमुई के दक्षिण-पूर्व से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सेंट थॉमस चर्च एक कैथोलिक चर्च है। इसकी स्थापना 1950 ई. में फ्रेंच साइस एस. जे ने की थी। इस चर्च के प्रथम पादरी थॉमस वेट्टीकेड थे। जमुई जिले के मोगहार स्थित गुरूद्वारा पक्की संगत प्राचीन गुरूद्वारों में से है। माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां सिक्खों के नौवें गुरू, गुरू तेग बहादुर कुछ समय के लिए ठहरें थे। गुरूद्वारे में एक कमरा है। माना जाता है कि इस कमरे में रखे हुए तकिया और कोट को गुरू जी ने प्रयोग किया था। गुरूद्वारे के समीप पर ही एक पुराना किला भी है। जमुई जिला मुख्यालय के पूर्व से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गिद्धौर में मिन्टो टॉवर है। यह टॉवर बिहार के प्रमुख पयर्टन स्थलों में से है। मिन्टो टॉवर का निर्माण महाराजा रामेश्वर प्रसाद सिंह ने करवाया था। यह टॉवर लॉर्ड मिन्टो, भारत के गर्वनर जर्नल और वाइसराय की याद में बनवाया गया थाए जो 10 फरवरी 1960 ई. में यहां घूमने के लिए आए थे। काफी संख्या में पर्यटक यहां आना पसंद करते है। मिन्टो टॉवर के समीप ही एक मंदिर भी है।मुई के पश्चिम से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिंकदरा में जैन मंदिर और एक धर्मशाला स्थित है। इस धर्मशाला में कुल 65 कमरें है। मंदिर स्थित यह धर्मशाल जैन भक्तों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराती है। यह धर्मशाल मंदिर के भीतर स्थित है। जैन मंदिर भगवान महावीर को समर्पित है। काफी संख्या में लोग मंदिर में आते हैं। इसके अलावा यह स्थान भगवान महावीर के जन्म स्थान के रूप में भी जाना जाता है। चन्द्रशेखर संग्रहालय मल्टी-परपस म्यूजियम है। इसकी स्थापना 1985 ईण् में हुई थी। जमुई स्थित चन्द्रशेखर संग्रहालय की स्थापना प्रोफेसर डां. श्यामनंदन प्रसाद ने की थी। पुरातात्विक वस्तुएं, टेरीकोटा सील और प्राचीन चट्टान आदि इस संग्रहालय में देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्तए संग्रहालय में भगवान विष्णुए भगवान सूर्या, देवी उमा और दुर्गा की अनेक प्रतिमाएं देखी जा सकती है। यह संग्रहालय चन्द्रशेखर सिंह संग्रहालय के नाम से प्रसिद्ध है। यह संग्रहालय प्रत्येक दिन खुला रहता है। केवल सोमवार को अवकाश रहता है। जुमई के उत्तर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जगह धार्मिक केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है। माना जाता है कि जैनों के नौवें तीर्थंकर सुविधिनाथ का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में भक्त यहां आते हैं। इसके अलावा यहां लोगों के लिए रहने की सुविधा भी प्रदान की गई है। प्रसिद्ध जैन मंदिर कुमार ग्राम प्राचीन देवी मंदिर के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि इंदापी जिसे इंद्रप्रस्थ के नाम से भी जाना जाता है, वह भी यहां घूमने के लिए आए थे। काली मंदिर जुमई जिले के मालयपुर गांव स्थित है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है। प्रत्येक वर्ष इस जगह पर बहुत ही प्रसिद्ध मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले को काली मेला के नाम से जाना जाता है। जिला मुख्यालय से लगभग 52 किलो मीटर दूरी पे मिनी शिमला के नाम से विख्यात सिमुलतला सुंदर व मनोरम छठाओं से घिरा एक सुन्दर स्थल है। यहां ठंड के दिनों में पर्यटक सिमुलतला की हरे भरे बाग बगीचे व सुन्दर-सुन्दर झरने व पहाड़ों का दीदार करते हैं। यहां की जलवायु की प्रशंसा अपने संपूर्ण भ्रमण पुस्तक में स्वामी विवेकानंद ने खूद की है। और लिखा है सर्वोत्तम जलवायु सिमुलतला की है। स्वामी विवेकानंद जी दो दफा सिमुलतला का भ्रमण किये है। वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल के कई नामी गिरामी लोगों का भव्य मकान सिमुलतला की पर्यटक व्यवसाय को जीवित करता है। पर्यटकों के सिमुलतला में आने से कई बेरोजगारों को इससे जुड़ी रोजगार मिलता है। जिले के सोनो प्रखंड से 3 किलो मीटर की दुरी पे स्तिथ है। यह जगह छोटे-बड़े पहाड़ो से पूरा घिरा हुआ है। यहाँ का मुख्य आकर्षण बेंगा पहाड़ हे जो की मेढक की तरह दीखता है इस पहाड़ के ऊपर भगवन शिव जी का एक मंदिर भी है भगवन शिव के अलावा माता दुर्गा, हनुमान जी का भी मंदिर है। यहाँ पे लोग नया साल एमकर संक्रांति के दिन हजारों की संख्या में जमुई जिला और राज्य के दुसरो जिलों के भी लोग घुमने आते है। यहाँ के लोग अपने घर आये हुए मेहमानों को इस प्राकृतिक स्थल का दर्शन कराना नहीं भूलते है। वायु मार्गयहां का सबसे निकटतम हवाई अड्डा पटना स्थित जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, पटना है। पटना से जमुई 161 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अतिरिक्त गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है। गया से जमुई 136 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जमुई रेलमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से पहुंचा जा सकता है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जमुई जंक्शन है। भारत के कई प्रमुख शहरों से सड़कमार्ग द्वारा जमुई आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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