अब राष्ट्रपति भवन में होगा पर्यटन

04-Jul-2016 ||    ||   

अब राष्ट्रपति भवन में होगा पर्यटन नई दिल्ली। दिल्ली के दिल में मौजूद भारतीय राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास राष्ट्रपति भवन का दीदार अब ज्यादा से ज्यादा लोग कर सकेंगे। लुटियन की दिल्ली में राससीना हिल पर बने किसी उपनगर सरीखे इस विशालकाय परिसर को लोगों से और ज्यादा जोडऩे के लिए तमाम कवायदें हो रही हैं। इसके तहत तीन पर्यटक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक सैलानी इससे रूबरू हो सकें। आलीशान राष्ट्रपति भवन और आम जन के बीच कड़ी को और मजबूत बनाने के मकसद से यहां मुख्य इमारत, संग्रहालय और गार्डन के रूप में तीन ऐसे क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं, जहां लोग निजी और सामूहिक रूप से उन्हें देख सकें। इस साल 25 जुलाई को इन तीनों क्षेत्रों यानी सर्किटों का विधिवत उद्घाटन भी किया जाएगा। इस मामले में राष्ट्रपति भवन से जुड़े शीर्ष अधिकारी और देश के प्रमुख टूर ऑपरेटर दिलचस्पी ले रहे हैं। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की सचिव अमिता पॉल ने इस सिलसिले में गुरुवार को कई अग्रणी टूर ऑपरेटरों से बात भी की। पॉल ने उनसे कहा कि वे भारतीय और विदेशी पर्यटकों को राष्ट्रपति भवन को लेकर जागरूकता प्रसार करने में सक्रियता दिखाएं ताकि अधिक से अधिक पर्यटक इसे देखने के लिए आएं। पॉल ने कहा कि राष्ट्रपति भवन प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने की योजना बना रहा है। पॉल ने इस मामले में राष्ट्रपति मुखर्जी के कार्यकाल में आम लोगों को राष्ट्रपति भवन से जोडऩे की दिशा में की गई पहल का भी जिक्र किया। उन्होंने एक बयान में कहा कि जुलाई, 2012 में जबसे प्रणव मुखर्जी ने देश के राष्ट्रपति का पदभार संभाला है, तब से वह इस कोशिशों में जुटे हैं कि लोगों को इस भवन के प्रत्येक पहलू से रूबरू होने का मौका मिले। इससे पहले राष्ट्रपति मुखर्जी भी कई बार कह चुके हैं कि जनता के लिए राष्ट्रपति भवन को और ज्यादा खोला जाना चाहिए। जो लोग अंग्रेजी राज में बनी इस शानदार इमारत को देखने की हसरत पाले हुए हैं, उनके लिए अब इसे देखना और सुविधाजनक हो जाएगा। उनकी सहूलियत का ध्यान रखते हुए अब यह व्यवस्था की जा रही है कि वे ऑनलाइन भुगतान करके भी यहां का दौरा कर सकते हैं। पॉल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति भवन की मुख्य इमारत के अलावा दो संग्रहालय परिसर और राष्ट्रपति भवन के बेहद खूबसूरत गार्डन को भी टूरिस्ट सर्किट में जोड़ा जाएगा। देश की धरोहरों में शामिल इस इमारत को देखने में लोगों की काफी दिलचस्पी होती है। ट्रिप एडवाइजर पर 1,100 से अधिक लोगों ने इसकी समीक्षा लिखी हैं। अभी राष्ट्रपति भवन देखने के लिए 25 रुपये का टिकट लगता है। हालांकि 12 साल से कम के बच्चों का प्रवेश निशुल्क है। मगर यहां आने के लिए कुछ दिन और वक्त बंधे हुए हैं। राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट के अनुसार केवल शुक्रवार, शनिवार और रविवार को ही लोग यहां आ सकते हैं। इसमें राजपत्रित अवकाशों को शामिल नहीं किया गया है। साथ ही यहां सुबह 9 बजे से दोपहर 4 बजे तक ही घूमा जा सकता है। भारत के राष्ट्रपति से पहले यह भवन ब्रिटिश वायसराय का आधिकारिक आवास हुआ करता था। इसके वास्तुकार भी एडविन लैंडसीर लुटियंस ही थे, जिनके नाम पर लुटियन की दिल्ली मशहूर है। नई दिल्ली में ब्रिटिश वायसराय के लिए भवन निर्माण का फैसला 1911 के दिल्ली दरबार में हुआ था, जब यह तय किया गया था कि भारत की राजधानी को कलकत्ता से उसी साल दिल्ली स्थानांतरित किया जाएगा। चार मंजिला मुख्य इमारत में 340 कमरे हैं। यहां 70 करोड़ ईंटों और 30 लाख घन फीट पत्थर से 2,00,000 वर्ग फुट का फ्लोर एरिया बनाया गया है। इमारत में बमुश्किल ही इस्पात का उपयोग हुआ। राष्ट्रपति की वेबसाइट के अनुसार भवन को चार साल में पूरा होना था लेकिन इसे पूरा होने में 17 साल लग गए।

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