मारवाड़ों की नगरी में आपका स्वागत

29-Jun-2016 ||    ||   

मारवाड़ों की नगरी में आपका स्वागत नई दिल्ली। थार रेगिस्तान के किनारे बसा जोधपुर जिसे सूर्य नगरी के नाम से भी जाना जाता है। इस शहर को १४५९ में राव जोधा ने बसाया था उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम जोधपुर पड़ा। यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। जोधपुर अपनी सांस्कृति विरासत और ऐतिहासिक धरोहर के लिए संसार भर में मशहूर है। यहां का किला व महल इस शहर के राजसी गौरव की मिसाल है ओर पर्यटकों के आकर्षण का केंन्द्र है। साल में एक बार आयोजित होने वाला मारवाड़ समारोह शहर के प्रमुख संास्कृतिक समारोह के रूप में मनाया जाता है। मेहरान गढ़ का किला १२५ मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित ५ किलोमीटर लंबा भव्य किला राजस्थान की विराट इमारतों में से एक है। यह किला मयूर ध्वज के नाम से भी जाना जाता है। बाहर से अदृश्य घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले में ४ द्वार है। किले में कई भव्य महल है इनमें मोती, महल, फूल, शीश महल, सिलेह खाना, ओर दौलत खाना प्रमुख है। किले के अद्भुत नक्काशीदार दजवाजे ओर जालीदार खिड़कियां महल की खूबसूरती को बयां करती है। किले में शही साजोसामान ,पालकीयों,संगीत वाद्यों,पोशाकों व विभिन्न शैलीयों के चित्रों का संग्रह भी है जो देखने लायक है। उम्मेद भवन पैलेस ऐतिहासिक रूप से यह भवन बहुत महत्वपूर्ण है यह महल २०वीं सदी की एकमात्र ऐसी इमारत है जिसका निमाण आकाल राहत परियोजना के तहत हुआ था। इस महल से आकाल पीडि़त लगभग ३००० लोगों को कई वर्ष तक रोजगार मिला था। लगभग २० एकड़ में फैले बलुआ पत्थरों से निर्मित यह महल १६ वर्षी में तैयार हुआ था। १८३ फुट ऊंचे गुंबद वाले इस महल में ३०० से भी ज्यादा कमरे है। इस महल के आधे हिस्से को पांच सितारा होटल में तब्दील कर दिया गया है। जसवंत थड़ा यह मेहरानगढ़ किले के पास स्थित एक छोटी सी पहाड़ी पर निर्मित महाराजा जसवंत सिंह द्धितीय का स्मारक है। सफेद संगमरमर से निर्मित यह स्मारक जोधपुर के इतिहास की याद दिलाता है मंडोर गार्डन जोधपुर से ९ किलोमीटर दूर मारवाड़ की प्राचीन राजधानी मंडोर में जोधपुर के शासकों के स्मारक है। यहां कई ऊंचे-ऊंचे चट्टानी चबूतरे है वह एक बड़ी चट्टान में तराशी हुई देवी देवताओं की पंद्रह आक्रतीयां है। अपने आकर्षक बगीचों के कारण यह स्थान एक प्रचलित पिकनिक स्थल बन गया है। बालसमंद झील इस सुंदर झील का निर्माण ईसवी सन् ११५९ में हुआ था। तीन तरफ पहाडिय़ों से घिरी यह झील उम्मेद भवन की खूबसूरती में चार चांद लगाती है। झील के बीच बने भव्य महल का भीतरी भाग यूरोपियन स्टाइल का है मगर बाहरी दीवारें परंपरागत नक्काशदीार है। यहां खूबसूरत बगीचे भी है। भ्रमण करने के लिए यह एक रमणीय स्थल है। कायलाना झील शहर से ११ किलोमीटर दूर स्थित यह झील पिकनिक स्पाट के रूप में प्रसिद्ध है। यहां बगीचे है और बोटिंग करने की सुविधा है। शहर से दूर और खूबसूरत स्थल होने के कारण यह एक सुंदर पर्यटन स्थल है कहां ठहरे यहां ठहरने के लिए आपको ४००रुपये से ४हजार रुपए तक का कमरा मिल जाएगा ।इसके अलावा यदि पांच सितारा होटल में रहने की इच्छा हो तो आस-पास के रास और राहतगढ़ इलाके में ठहर सकते है। इसके अलावा हवाई अड्डे के पास बसे उम्मेद भवन में भी सभी सुविधाएं है। कहां-कहां घूमें जोधपुर के तत्कालीन राजा महाराज गज सिंह की ओर से बनाया गया उम्मेद भवन से जोधपुर भ्रमण की शुरुआत कर सकते है। इस भवन का बड़ा हिस्सा होटल में तब्दील हो चुका है। एक छोटे हिस्से में शाही परिवार से जुड़ी यादों को सहेजा गया है। जिन्हें पर्यटक देखते है। यहां अन्य चीजों के अलावा राज परिवार की कई किस्म की घडिय़ों का संकलन है। उम्मेद भवन के अलावा यहां घूमने लायक है। मेहरनगढ़ किला इसे एक ऊंचे पहाड़ी पर राव जोधा ने १४५९ में बनवाया था। किले में मां चामुंडा का मंदिर भी है। खान पान जोधपुर में खाने की हर चीज का एक अलग स्वाद है। नई सड़क पर चंद्र विलास के नमकीन जनता स्वीट होक के गुलाब जामुन और राजभोग के अलावा स्पेशल राजस्थानी राज कचौड़ी का स्वाद भी आप ले सकते है। यहां का मिर्ची पकौड़ा भी खास है।

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